हिमाचल के सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती पर बना संशय, कमेटी करेगी अंतिम फैसला
शिमला।
हिमाचल प्रदेश के सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर सरकार के सामने नई प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है। प्रदेश में संचालित 158 सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती संबंधी प्रस्ताव पर फिलहाल अंतिम निर्णय टाल दिया गया है। राज्य मंत्रिमंडल की हालिया बैठक में इस मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई, जिसके बाद मामले का विस्तृत अध्ययन करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है।
सरकार की ओर से गठित इस समिति की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री करेंगे। समिति में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी तथा तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी को भी शामिल किया गया है। यह समिति शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया, मेरिट प्रणाली और संभावित प्रशासनिक प्रभावों का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।
कैबिनेट बैठक में उठे कई सवाल
सूत्रों के अनुसार कैबिनेट बैठक में शिक्षा विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव पर मंत्रियों ने कई व्यावहारिक और सेवा संबंधी प्रश्न उठाए। चर्चा के दौरान यह चिंता सामने आई कि यदि बड़ी संख्या में शिक्षकों को मेरिट के आधार पर नए स्कूलों में भेजा जाता है, तो इससे प्रदेशभर के स्कूलों में व्यापक स्तर पर तबादले करने पड़ सकते हैं।
इसी कारण सरकार ने तत्काल फैसला लेने के बजाय विषय को समिति के हवाले करने का निर्णय लिया है ताकि सभी पहलुओं का अध्ययन कर संतुलित समाधान निकाला जा सके।
5623 शिक्षकों की तैनाती की थी तैयारी
शिक्षा विभाग ने पहले चरण में प्रदेश के विभिन्न सरकारी स्कूलों में कार्यरत 5623 शिक्षकों को सीबीएसई स्कूलों में तैनात करने की योजना बनाई थी। इसके लिए हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के माध्यम से स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की गई थी।
इस परीक्षा में कुल 9821 शिक्षकों ने भाग लिया था, जिनमें से 6084 शिक्षक मेरिट सूची में शामिल हुए। शिक्षा निदेशालय ने इन शिक्षकों की काउंसलिंग का कार्यक्रम भी जारी कर दिया था, लेकिन बाद में इसे स्थगित कर दिया गया।
147 प्रिंसिपलों को स्कूल आवंटित, फिर भी प्रक्रिया अधर में
जानकारी के अनुसार 147 प्रिंसिपलों की काउंसलिंग पूरी कर उन्हें मेरिट के आधार पर स्कूल भी आवंटित कर दिए गए थे। हालांकि शिक्षकों की तैनाती प्रक्रिया पर रोक लगने के कारण प्रिंसिपलों की नियुक्तियों को भी अंतिम रूप नहीं मिल पाया है।
तबादलों का बड़ा गणित बना चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 5623 शिक्षकों को नई जगहों पर तैनात किया जाता है तो उतनी ही संख्या में अन्य शिक्षकों को भी स्थानांतरित करना पड़ेगा। इससे प्रदेश के अनेक स्कूलों की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सीबीएसई स्कूलों में योग्य और प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ अन्य स्कूलों में शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
सीबीएसई स्कूलों में बढ़ रहा विद्यार्थियों का रुझान
हालांकि कुछ विद्यार्थियों ने सीबीएसई स्कूलों से नाम वापस लिया है, लेकिन कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो सरकारी सीबीएसई स्कूलों की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
शिक्षा विभाग के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2025-26 में सरकारी सीबीएसई स्कूलों में 78,474 विद्यार्थी नामांकित थे। वहीं नए सत्र 2026-27 में यह संख्या बढ़कर 82,717 तक पहुंच गई है। यानी एक वर्ष में 4,243 विद्यार्थियों की वृद्धि दर्ज की गई है।
438 विद्यार्थियों ने बदला स्कूल
इस बीच प्रदेश के विभिन्न सरकारी सीबीएसई स्कूलों से 438 विद्यार्थियों ने स्थानांतरण लेकर हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में प्रवेश लिया है।
सबसे अधिक 100 विद्यार्थियों ने पोर्टमोर स्कूल से नाम कटवाया। इसके अलावा सरकाघाट और बद्दी से 40-40, चंबा से 35, राजगढ़ से 30 तथा चुवाड़ी से 24 विद्यार्थियों ने स्कूल छोड़ा है। शिक्षा विभाग का कहना है कि इनमें से कई विद्यार्थियों ने सह-शिक्षा व्यवस्था या व्यक्तिगत पसंद के कारण स्कूल बदले हैं।
कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
फिलहाल प्रदेशभर के हजारों शिक्षक और शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारी समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। समिति की सिफारिशों के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति पूरी तरह मेरिट के आधार पर होगी या फिर कोई नई व्यवस्था लागू की जाएगी।
